बेकार ही लोग उज़्रेहयात बनाते है
बसर करनी है जिंदगी उन्हे अफसानोमें
બેકારમાં લોકો જીવવાનું બહાનું બનાવે છે
એમણે તો જિંદગી કહાનીઓમા વીતાવાની છે
कितने अरमान कितने ज़जबात तुम्हे बता ना पाउ
जिंदगी भी क्या है मेरी? एक अधूरा नगमा हो जैसे
કેટલાય અરમાન અને કેટલીય લાગણીઓ બતાવી ના શકું
મારી જિંદગી પણ શું છે? એક અધૂરુ ગીત જાણે
हर निगाहका एक ही तसव्वुर
तुम आते हो और वस्ल होता है
હર એક નજરની એક જ કલ્પના
તમે આવો તો મિલન થાય છે
पहेले बरसो-माहो बादमे रात दिन
अब करती हुं हर घडी तुम्हारा इन्तेज़ार.
પહેલા વરસો મહીનાઓ પછી રાત દિવસ
હવે હરેક ક્ષણ તારી પ્રતીક્ષા કરું છું
अच्छा लगता है मुजेह इन्तेज़ार करना
पर लोग देखे तमाशा इसका डर रेहता है
તારી પ્રતીક્ષા કરવાની સારી લાગે છે
પણ લોકો એનો તમાશો જુએ એનો ડર છે
નજમા મરચંટ

તારી પ્રતીક્ષા કરવાની સારી લાગે છે
પણ લોકો એનો તમાશો જુએ એનો ડર છે…..
fine !
पहेले बरसो-माहो बादमे रात दिन
अब करती हुं हर घडी तुम्हारा इन्तेज़ार.
पहेले बरसो-माहो बादमे रात दिन
अब करती हुं हर घडी तुम्हारा इन्तेज़ार.
बहोत ही अच्छी कविता नज्माजी की…इंतज़ार की बात कितनी अच्छी तरह कही है ..और कौन नहीं करत इंतजार यह भी सवाल है….डर सिर्फ मौत के बाद ही नहीं होता ..इन्जेज़ार मौत के बाद नहीं होता ?..यहाँ तो कब्र भी इंतज़ार करा दिया ..
कितने अरमान कितने ज़जबात तुम्हे बता ना पाउ
जिंदगी भी क्या है मेरी? एक अधूरा नगमा हो जैसे
बोहोत ख़ूबसूरत, जिनके ख़ुआब ख़ुआब रेह जाएं वो ही इस अधूरा नगमा को समझ सकते हें
अच्छा लगता है मुजेह इन्तेज़ार करना
पर लोग देखे तमाशा इसका डर रेहता है
किया करें लोग तो तमाशा देख ते ही हॆम
क़िस्सा हॆ मेरी बरबादी का
ऒर शोक़ से दुनिया सुनती हॆ
पहेले बरसो-माहो बादमे रात दिन
अब करती हुं हर घडी तुम्हारा इन्तेज़ार.
अच्छा लगता है मुजेह इन्तेज़ार करना
पर लोग देखे तमाशा इसका डर रेहता है
बहोत खूब
मुहब्बत भरी बातों से जीवन अमृत पियें। दिल में शौक़ व उमंग है और आँखें बेताब हैं कि किसी तरह जल्दी से जल्दी उस के नूरानी चेहरे की ज़ियारत हो जाये। यहीँ से इंतेज़ार का अर्थ व मअना समझ में आते हैं। जी हाँ ! सभी इंतेज़ार कर रहें हैं कि वह आयें और अपने साथ ख़ुशियों का तोहफ़ा ले कर आयें।
वास्तव में यह इन्तेज़ार कितना दिलकश, खुबसूरत, हसीन व मिठास से भरा हुआ है ! अगर इस की खुबसूरती को नज़र में रखा जाये और इस के मिठास को दिल की गहराईयों से चखा जाये, तो यह बात समझ में आ सकती है।
ગુજરાતીમા સમપંક્તી ભાષાંતર મઝાનુ થયું છે.
ધન્યવાદ
उज़्रेहयात,तसव्वुर…
वस्ल….આવા ઉર્દુ શબ્દો…ના સમજાત …જો ભાષાંતર ના કર્યુ હોત તો…. પણ મઝાની રચના….
अच्छा लगता है मुजेह इन्तेज़ार करना
पर लोग देखे तमाशा इसका डर रेहता है
તારી પ્રતીક્ષા કરવાની સારી લાગે છે..saaru thayu aape gujarati ma shabd lakhya..Agree with Jagtapbhai..