बहोत रोऊ तो भी क्यां?
दिलकी लगी कम तो नहीं होगी.
ખૂબ રડું તો પણ શું છે?
દિલની પીડા ઓછી તો થવાની નથી.
धीरेसे पूछा इश्के हाल उनका मैंने
तो बोले जिंदगीका सोचो वोह चीज है जीनेकी.
ધીમેથી મે એને પ્રેમની હાલત પૂછી,
તો કહ્યુ જિંદગી માટે વિચાર એ ચીજ છે જીવવાની
कांप कांप उठता है जूनू मेरा,
जब वोह चिल्लाके कहेते है,
वफा,वफा बस वफा ही है तुजमे,
मर क्युं नही जाती राहे-वफामे.
મારૂ પાગલપણું કંપી ઉઠે છે,
એ જ્યારે બૂમ પાડીને કહે છે,
વફા,વફા બસ વફા જ છે તારાંમાં,
મરી કેમ નથી જતી વફાના રસ્તામાં?
सोचती हुं बैठके लहदके आगे,
यही वोह घर है जिसकी तलाश थी मुजेह.
કબર પાસે બેસીને વિચારું છું,
શું આ એજ ઘર છે જેની મને શોધ હતી?
कयां सोचते है आप मेरी लहदके आगे खडे खडे?
गरीबखाना पसंद नही आया देरसे आनेवालेको?
મારી કબર પર ઉભા ઉભા શું વિચારો છો?
ગરીબનું ઘર પસંદ ના પડ્યુ,મોડા આવવાવાળાને?
-नजमा मरचंट

सुंदर रचना !
खूबसूरत रचना
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“टेक टब” – ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )
अच्छी रही गझल. सोच मे डाल दीया.
“कयां सोचते है आप मेरी लहदके आगे खडे खडे? ”
बस यही कि आपकी लदह्के सामने मैं खडा हूं
लेकिन मेरे लीये तो लदह होगी ही नहीं, कोन कैसे खडा रहेगा !!!!!!
खूब नशिब हो आप.
बहोत रोऊ तो भी क्यां?
दिलकी लगी कम तो नहीं होगी.
जी हां मोहब्बत का ग़म ही ऎसा होता हॆ जिसे आशिक़ कभी नहीं भूलते, इस की तकलीफ़ में भी एक लज़्ज़त होती हॆ
ग़मे हसती का असद किस से जुज़ मरगे इलाज
शमा हर रंग में जलती हे सहर होने तक
बोहोत खूबसूरत शाइरी नजमा की
” बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता ”
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कांप कांप उठता है जूनू मेरा,
जब वोह चिल्लाके कहेते है,
वफा,वफा बस वफा ही है तुजमे,
मर क्युं नही जाती राहे-वफामे.
bahot hi achchi lagi rachana kaafi gahraai hai…shukria post karane ke liye
very nice
लहद
बहोत रोऊ तो भी क्यां?
दिलकी लगी कम तो नहीं होगी.
ખૂબ રડું તો પણ શું છે?
દિલની પીડા ઓછી તો થવાની નથી.
Ramesh Patel(Aakashdeep)
कयां सोचते है आप मेरी लहदके आगे खडे खडे?
गरीबखाना पसंद नही आया देरसे आनेवालेको?
bahut achchhe…