
बहोत हो चूका ऐ जिंदगी,अब संभल जा,
मौतके बहाने न जिलायेगी जबरदस्ती तुं मुझे.
બસ ઘણૂ થયું એ જિંદગી, સંભલી જા,
મૃત્યુના બહાનાથી જબરદસ્તીથી ન જીવાડીશ.
ख्वाबे-फरामोश जिंदगीसे क्या शिकवा?
जी गई जब पूरी उम्र पुख्ता यकीं ऐ वादोपे.
મૃગજળ જેવી જિંદગીથી શું ફરિયાદ?
જ્યારે આખી જિંદગી જીવી ગઈ વિશ્વાસ પર.
किस्मते इश्क न पूछो ‘नजु’का,
सर फोडते रहे उम्रभर संगके साथ.
નસીબ પ્રેમના ના પૂછો નજુ’થી,
જિંદગીભર માથું પછાડતી રહી પથ્થરથી.
कभी तो देखाकर तेरा पल्लु महाजन,
बेईमानी भरी है तेरे जीवनसे ज्यादा.
પંડિત ક્યારેક તો તારો પાલવ જો,
બેઇમાની ભરી છે જિંદગીથી પણ વધારે.
रेह गया मलाल जिंदगीभर मुझे,
दिल लगा भी तो एक बेदाद महाजनसे.
જિંદગીભર માટે આ દુખ રહ્યુ મને,
દિલ લગાવ્યું તો પણ એક બેદાદ પંડિતથી.
બેદાદ=ફરિયાદ ન સાંભળનાર
नजमा मरचंट
अपने दिल का दर्द खुब बयान किया हॆ नजमा नॆ
ऒर आखिर में तो साफ़ कॆह दिय
रेह गया मलाल जिंदगीभर मुझे,
दिल लगा भी तो एक बेदाद महाजनसे.
बड़ी दिल गुज़ाद शाइरी की हॆ नजमा ने
कभी तो देखाकर तेरा पल्लु महाजन,
बेईमानी भरी है तेरे जीवनसे ज्यादा.
પંડિત ક્યારેક તો તારો પાલવ જો,
બેઇમાની ભરી છે જિંદગીથી પણ વધારે.
प्यारी नजु, क्या तजुर्बात पाया है !!! अच्चा हुआ कह दिया ताकि सामने तो आया..
कितना कुछ कह देती है नजु थोडी सि पंक्तिओमें..और बेझीझक सच कह देती है. बेईमान पंडीत और जिन्दगी..क्या हालत की है दिलदारा की..सच्चे प्यार की तो कोइ जगह ही नहि है…
सपनाजि आपको शुक्रिया.. यह पोष्ट करने के लिये
Main shayar naheen fir bhi na jane kyoon mujhe Najma ki gazalein choo jati hain is turha ki kai der tuk mere khayalon mein taza raheteen hain.Good job Najma,Iam sure u r happy.